पुलिस की हाईटेक संसाधनों से लैस कई टीमें, जिनमें तकनीकी विशेषज्ञ और प्रदेशभर में तलाशी का नेटवर्क शामिल है, के बावजूद पूर्व आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या का आरोपित वरुण कुमार पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है। वह न फोन इस्तेमाल कर रहा है, न एटीएम से रुपये निकाल रहा है और न ही ऐसा कोई सुराग छोड़ रहा है, जिससे पुलिस उसके अगले ठिकाने तक पहुंच सके। हत्या के बाद से उसकी तलाश में जुटी पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जब आरोपित खुद डिजिटल दुनिया से दूरी बना ले, तो तकनीक के सहारे उसे पकड़ा कैसे जाए। रातीबड़ के सूरज नगर में रहने वाले पूर्व आइएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल के घर वरुण 26 सितंबर को केयरटेकर की नौकरी करने पहुंचा था। महज पांच दिन बाद 30 सितंबर की रात करीब एक बजे सोते समय उसने सर्जिकल ब्लेड से अग्रवाल के गले पर हमला कर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद रात करीब ढाई बजे वह घर से निकला। यहीं से शुरू हुई पुलिस और आरोपित के बीच ऐसी दौड़, जिसमें हर बार पुलिस उसके पीछे तो पहुंची, लेकिन वह चार कदम आगे निकल गया। ग्वालियर में तलाशी के बीच वरुण का मोबाइल उत्तर प्रदेश के वृंदावन में नाले के किनारे मिला। मोबाइल के चालू होने पर पुलिस वहां पहुंची तो चौंक गई। मोबाइल वरुण के हाथ नहीं बल्कि मानसिक रूप से अस्वस्थ एक व्यक्ति के पास था। उसने बताया कि मोबाइल उसे नाले के पास मिला था। पुलिस को फोन तो मिल गया, लेकिन आरोपित तक पहुंचने का रास्ता फिर बंद हो गया। जांच में सामने आया कि वरुण के नाम पर सिर्फ एक ही बैंक खाता है, जिसमें महज दो रुपये ही हैं। उसका खाता पंजाब के पटियाला में भारतीय स्टेट बैंक में है। ऐसे में एटीएम से पैसे निकालने पर मिलने वाले संभावित सुराग भी पुलिस को नहीं मिल रहे हैं। उसके नाम पर मिली सिम भी अगस्त 2026 में बंद हो चुकी थी। इसके बाद से उसका मोबाइल गुम होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पुलिस को जब तक सूचना मिली, तब तक आरोपित पहुंच से दूर हो गया था। पुलिस डिजिटली और स्थानीय मुखबिरों की मदद से उसकी तलाश कर रही है। टीमें लगातार उसके संभावित ठिकानों व स्वजन को ट्रेस कर रही है। पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि पुलिस के सामने सबसे मुश्किल यह है कि आरोपित की पहचान, घर से निकलने का समय और शुरुआती यात्रा का रास्ता पता होने के बावजूद उसका पता नहीं चल रहा। वह मोबाइल चालू नहीं करता, बैंकिंग ट्रांजेक्शन नहीं करता और सीसीटीवी की पकड़ से बाहर होने के बाद कोई नया सुराग नहीं देता। वरुण कुमार के पास न कोई बड़ी आर्थिक ताकत है, न आधुनिक तकनीक और न ही भागने के लिए कोई खास संसाधन। पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस की हर तकनीक को वह फेल कर रहा है।
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बिना सुराग छोड़े भागा पूर्व आईएएस का हत्यारोपी, पुलिस की तकनीक फेल
20 अक्टूबर 2026 को 10:29 pm बजे

बिना सुराग छोड़े भागा पूर्व आईएएस का हत्यारोपी, पुलिस की तकनीक फेल
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