राज्य शासन ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड नामक कीटनाशक के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि यह मानव और पशुओं के लिए बेहद हानिकारक पाया गया है। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इस खतरनाक कीटनाशक का निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए तत्काल विक्रय और भण्डारण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। जिन निर्माताओं के पास पैराक्वेट डाइक्लोराइड के पंजीकरण प्रमाण पत्र हैं, उन्हें तत्काल केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड और पंजीकरण समिति को वापस करने का आदेश दिया गया है। इस कीटनाशक के बचे हुए स्टाक को नियम और प्रक्रिया के अनुसार नष्ट करने की कार्रवाई के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। यह प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार ने भी कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत पैराक्वेट डाइक्लोराइड के नए रजिस्ट्रेशन और पहले से जारी सभी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स को रद्द कर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। दुनिया के लगभग 70 देशों में इस कीटनाशक का उपयोग पहले से प्रतिबंधित है, जो इसकी खतरनाक प्रकृति को दर्शाता है। पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक शक्तिशाली और तेजी से काम करने वाला कीटनाशक है। यह पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही उन्हें तुरंत जलाकर नष्ट कर देता है। इसे 'ग्रामोक्सोन' (ग्रमोक्षोने) जैसे ट्रेड नामों से भी जाना जाता है। इसकी कार्यप्रणाली पौधों को तेजी से सुखाने की है, लेकिन यही गुण इसे इंसानों और जानवरों के लिए अत्यधिक विषैला बना देता है। इस विषैले रसायन के शरीर में जाने या त्वचा के संपर्क में आने से फेफड़े और गुर्दे (किडनी) गंभीर रूप से खराब हो सकते हैं। चिंताजनक बात यह है कि इसके लिए कोई विशिष्ट एंटीडोट (विषारोधी इलाज) उपलब्ध नहीं है, जिसका अर्थ है कि इसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। किसानों के बीच, विशेषकर मूंग की फसल में, पैराक्वेट डाइक्लोराइड का उपयोग एक शॉर्टकट के रूप में काफी प्रचलित था। इसका छिड़काव फसल की कटाई से ठीक पहले पत्तियों को सुखाने और फसल को जल्दी पकाने के लिए किया जाता था। इस प्रक्रिया से मूंग के हरे पौधे और पत्तियां 24 से 72 घंटों के भीतर पूरी तरह सूख जाती थीं। पत्तियों के सूख जाने से फसल को काटना और थ्रेसिंग करना आसान हो जाता था, जिससे मजदूरों का खर्च और समय दोनों की बचत होती थी। यह सुविधा किसानों को आकर्षित करती थी, भले ही भारत सरकार के नियमों के अनुसार इसका उपयोग मूंग की फसल पर करने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद, किसान अवैध रूप से इसका इस्तेमाल करते रहे। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से, पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक अत्यंत खतरनाक केमिकल है। इसके संपर्क में आने या इसके अवशेषों वाली मूंग के सेवन से कैंसर, लिवर, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यह केमिकल शरीर में जाने या गलती से पी लिए जाने पर जानलेवा साबित होता है, क्योंकि इसका कोई प्रभावी इलाज या एंटीडोट मौजूद नहीं है। किसानों द्वारा इस कीटनाशक का उपयोग मुख्य रूप से मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए किया जाता था, ताकि कटाई और थ्रेसिंग का काम आसान हो सके। यह विधि समय और श्रम दोनों बचाती थी, लेकिन इसके गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को नजरअंदाज किया जाता रहा। निर्माता कंपनियों के पास पैराक्वेट डाइक्लोराइड का जो भी स्टॉक बचा है, उसे तत्काल नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए है कि यह खतरनाक रसायन बाजार में उपलब्ध न हो और इसका दुरुपयोग रोका जा सके। जिन निर्माताओं के पास इस कीटनाशक के वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र थे, उन्हें वे तत्काल केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड और पंजीकरण समिति को वापस करने होंगे। यह कदम कीटनाशक के नियामक नियंत्रण को मजबूत करने और उसके बाजार से पूर्ण निष्कासन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। भारत सरकार ने कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत पहले ही इस कीटनाशक के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी थी और मौजूदा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स को भी रद्द कर दिया था।
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राज्य शासन ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध
18 अक्टूबर 2026 को 11:52 pm बजे

राज्य शासन ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध
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