केंद्र सरकार ने राज्यों से सुनिश्चित करने को कहा
अक्सर मरीजों को इलाज के दौरान मनमाने दाम वसूलने और कीमतों में पारदर्शिता की कमी की शिकायतें आम रही हैं। यह समस्या सिर्फ बड़े निजी अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे क्लीनिकों और सरकारी अस्पतालों में भी इलाज के खर्च में पारदर्शिता का अभाव देखा जाता है। यह स्थिति खासकर निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बीमारी से बड़ी मुसीबत बन जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अस्पतालों और क्लीनिकों में स्वास्थ्य सेवाओं के शुल्क प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएं। निस्संदेह, यह मरीजों के लिए अधिक पारदर्शी और अनुकूल व्यवस्था बनाने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अक्सर उपचार में होने वाले खर्च की स्पष्ट जानकारी नहीं होती। परामर्श शुल्क, जांच, इलाज की प्रक्रियाओं और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलने से मरीजों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी और वे अचानक आने वाले वित्तीय बोझ से बच सकेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मुख्य सचिवों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। दरअसल, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (केंद्र सरकार) नियम 2012 के तहत अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी सेवाओं और सुविधाओं के शुल्क को ऐसी जगह प्रदर्शित करें जहां मरीज और उनके परिजन आसानी से देख सकें। सेवाओं और सुविधाओं की फीस अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में लिखी होनी चाहिए। हालांकि, सरकारी और निजी अस्पतालों के संचालक कीमतों की तय सीमा निर्धारित किए जाने पर आपत्ति जताते हैं। उनकी दलील है कि इससे उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। कई प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक संचालक इन निर्देशों को लागू करने में आने वाली कठिनाइयों का हवाला देते हैं। उनका कहना है कि इन नियमों को लागू करने से उपचार की आर्थिक व्यवहार्यता कमजोर हो सकती है, जिससे उपचार की परिचालन लागत, बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञता में अंतर को नजरअंदाज किया जा सकता है। निस्संदेह, इन चिंताओं पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन इन्हें कीमतों से जुड़ी आवश्यक जानकारी छिपाने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए। एक अच्छे निजी अस्पताल और सरकारी अस्पताल की लागत संरचना में अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन फिर भी मरीजों को इलाज के लिए सहमति देने से पहले यह जानने का अधिकार है कि उन पर कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा। इसके साथ ही, केंद्र सरकार का मेडिकल या आयुष वीजा पर आने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए ‘पैकेज रेट’ पर जोर देना भी महत्वपूर्ण है। इससे विदेशी मरीजों से मनमाने शुल्क नहीं वसूले जा सकेंगे।
