श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन-पूजन कर धर्मलाभ लिया, भजन संध्या का भी आयोजन
सीहोर छावनी क्षेत्र के नमक चौराहे पर वर्ष 1960 से चली आ रही नवरात्रि पूजन की परंपरा इस बार भी भक्ति और उत्साह के साथ निभाई गई। नव ज्योति संगठन के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय नवरात्रि महोत्सव का समापन पूर्णाहुति और भंडारे के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन-पूजन कर धर्मलाभ लिया। इस दौरान खाटू श्याम भजन गायक अखिलेश माहेश्वरी, उत्कृष्ट अग्रवाल और संतोष राठौर सहित अन्य प्रतिभाओं व सहयोगियों का सम्मान भी किया गया। महोत्सव के पहले दिन उज्जैन की तर्ज पर माता रानी की महाआरती की गई। इसके बाद पूरे नौ दिनों तक देवी का विशेष श्रृंगार, पूजन और आरती का क्रम अनवरत चलता रहा। सुंदरकांड पाठ और खाटू श्याम भजन संध्या जैसे आयोजनों ने नमक चौराहे को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भक्ति की गंगा में गोते लगाए। नव ज्योति संगठन के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि नमक चौराहे पर वर्ष 1960 से लगातार नवरात्रि में माता रानी की आरती और पूजन का यह अनुष्ठान चला आ रहा है। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने का भी माध्यम बनी है। संगठन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समाज में भक्ति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है। इस वर्ष के महोत्सव में संगठन अध्यक्ष हिमांशु सोनी, कार्यक्रम अध्यक्ष वंश पचौरी, उपाध्यक्ष अंशुल ताम्रकार, कोषाध्यक्ष गौरव अग्रवाल, सचिव गणेशा जयपुरिया, संगठन मंत्री राघव अग्रवाल और साज-सज्जा प्रभारी चंदन चौरसिया सहित अन्य पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनके अथक प्रयासों और सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। नमक चौराहे पर माता रानी की आराधना का यह सिलसिला दशकों से चला आ रहा है, जिसने इसे एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान दी है। हर साल नवरात्रि के दौरान यहाँ का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है, जहाँ स्थानीय निवासी और दूर-दूर से आए श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए थे। भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया, जिससे समुदाय के लोगों के बीच एकता और प्रेम का भाव और भी मजबूत हुआ। यह महोत्सव आपसी भाईचारे और धार्मिक एकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। संगठन का प्रयास है कि भविष्य में भी इस परंपरा को इसी उत्साह और भक्ति के साथ जारी रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जुड़ी रहें। यह आयोजन सीहोर के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
