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मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भिण्ड, वीरसिंह चौहान ने जनपद पंचायत गोहद की ग्राम पंचायत एण्डोरी की सचिव रामवीर चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं, नियमों की अवहेलना और शासकीय धन के गबन के गंभीर आरोपों के चलते की गई है। सीईओ जिला पंचायत भिण्ड चौहान ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गोहद के पत्र दिनांक 21 अक्टूबर 2026 के अनुसार यह निर्णय लिया है। पत्र में ग्राम पंचायत एण्डोरी के सचिव रामवीर चौहान पर शासकीय पद और शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है, जिसमें घोर वित्तीय अनियमितता, नियमों का उल्लंघन और सरकारी धन के गबन का उल्लेख है। आरोप है कि सचिव रामवीर चौहान ने 15वें वित्त आयोग की राशि का नियम विरुद्ध जाकर अवैध उपयोग किया। इसके अतिरिक्त, सामग्रियों की खरीद में मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियमों और अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। सचिव द्वारा बड़ी राशि 29,94,168/- का वित्तीय कूटरचित और स्वेच्छाचारी व्यय किया जाना भी उल्लेखित है। यह कृत्य मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 तथा मध्य प्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन, तथा अपील) नियम 1999 के सुसंगत प्रावधानों के तहत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। इन गंभीर आरोपों के चलते, आरोपी सचिव रामवीर चौहान के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्यवाही हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर, ग्राम पंचायत में व्याप्त वित्तीय अनियमितता, नियमों की अवहेलना और शासकीय धन के गबन के कारण सचिव रामवीर सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। यह आदेश ग्राम पंचायत एण्डोरी, जनपद पंचायत गोहद के संदर्भ में जारी किया गया है। निलंबन के साथ ही, चौहान के विरुद्ध विभागीय जांच भी संस्थित की गई है। इस जांच के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गोहद को विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। साथ ही, खण्ड पंचायत अधिकारी जनपद पंचायत गोहद को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह विभागीय जांच आरोपों की सत्यता को स्थापित करने और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जाएगी। निलंबन अवधि के दौरान, रामवीर चौहान का मुख्यालय जनपद पंचायत गोहद नियत किया गया है। उन्हें इस अवधि में शासन के नियमानुसार निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा, जो उनकी वित्तीय स्थिति को बनाए रखने में सहायक होगा। यह निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसका अर्थ है कि सचिव के रूप में उनका कार्यभार तुरंत समाप्त हो गया है और वे अगले आदेश तक अपने पद से दूर रहेंगे। यह कार्रवाई शासकीय धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के प्रति प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है। इस तरह के कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाते हैं कि सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी और नियमों के अनुसार हो। ग्राम पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि विकास कार्यों में बाधा न आए और जनता के पैसे का सही उपयोग हो सके। ग्राम पंचायत एण्डोरी में हुई इन वित्तीय अनियमितताओं की जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है। विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस निलंबन से अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सीख मिलेगी कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करें, अन्यथा उन्हें भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
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