पूरे देश में जहां विजयादशमी पर रावण का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है, वहीं मध्य प्रदेश के सतना जिले का कोठी गांव एक अनूठी परंपरा निभाता है। यहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि 25 फुट ऊंची और 22 फुट चौड़ी, लगभग 300 साल पुरानी 9 सिर वाली रावण की विशालकाय मूर्ति की पूजा की जाती है। यह अनोखी प्रतिमा कोठी पुलिस थाने के परिसर में ही स्थापित है और दशहरे के दिन पुलिस विशेष रूप से इसकी सुरक्षा करती है। 56 वर्षीय पुजारी रमेश मिश्रा बताते हैं कि यह मूर्ति लगभग 300 साल पहले स्थानीय शासकों द्वारा बनवाई गई थी और उनका परिवार तब से इसकी पूजा करता आ रहा है। रावण के आमतौर पर देखे जाने वाले 10 सिरों के विपरीत, इस मूर्ति में रावण के 9 सिर हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि रावण ने अपना एक सिर भगवान शिव को अर्पित कर दिया था, जिसके कारण उसे यह अनोखा रूप मिला। पुजारी रमेश मिश्रा ने अपने पूर्वजों से सुनी एक लोककथा का भी जिक्र किया, जिसके अनुसार कभी इस मूर्ति के पास एक छोटी नदी बहती थी। नदी के दूसरे किनारे पर एक ‘राम चबूतरा’ था, जहां कोठी के शासक रामलीला का आयोजन करते थे। इस रामलीला में भगवान राम नदी के उस पार से रावण की मूर्ति पर प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाते थे। नदी पर बने एक पुल को राम सेतु माना जाता था, जबकि रावण की तरफ की जमीन को स्थानीय लोग लंका कहते थे। रमेश मिश्रा ने एक और स्थानीय लोककथा का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार रावण ने उस जंगल की सीमाओं पर अपने जासूस तैनात कर रखे थे, जहां भगवान राम ने चित्रकूट में अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा बिताया था। मिश्रा ने यह भी बताया कि उमरिया जिले के चित्रकूट और पाली में भी रावण की ऐसी ही मूर्तियां मौजूद हैं। यह जानकारी इस अनूठी परंपरा के भौगोलिक विस्तार को दर्शाती है, जो केवल कोठी गांव तक ही सीमित नहीं है। इस मूर्ति का एक पुलिस थाने के अंदर होना और पुलिस द्वारा उसकी रक्षा करना अपने आप में एक अनोखी बात है। यह थाना उस रावण की रक्षा करता है जिसे देश के ज्यादातर हिस्सों में लोग जलाते हैं, जो एक विरोधाभासी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। इस साल 20 अक्टूबर को दशहरे का पर्व मनाया जाएगा, और रमेश मिश्रा व उनका परिवार एक बार फिर इस अनूठी मूर्ति के सामने पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ करेगा। यह परंपरा सदियों से इस गांव की पहचान बनी हुई है और इसे बनाए रखने का प्रयास जारी है। यह अनूठी पूजा परंपरा न केवल स्थानीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को एक अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। जहां देश के अन्य हिस्सों में रावण दहन होता है, वहीं कोठी गांव में रावण का पूजन होता है, जो इस क्षेत्र की विशिष्ट पहचान है।
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सतना के कोठी गांव में 9 सिर वाले रावण की होती है पूजा
20 अक्टूबर 2026 को 10:29 pm बजे

सतना के कोठी गांव में 9 सिर वाले रावण की होती है पूजा
