करीब 600 करोड़ की लागत वाली परियोजना का 84% काम पूरा हो चुका है
योजना के तहत सेवरखेड़ी में बैराज और सिलारखेड़ी में 51 एमसीएम क्षमता का विशाल बैलेंसिंग रिजर्वायर तैयार किया गया है, शेष काम जारी
उज्जैन में सिंहस्थ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के पानी से स्नान कराने की तैयारी ज़ोरों पर है। करीब 600 करोड़ रुपए की लागत वाली सिलारखेड़ी- सेवरखेड़ी परियोजना का 84 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस योजना के तहत सेवरखेड़ी में एक बैराज और सिलारखेड़ी में 51 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) क्षमता का विशाल बैलेंसिंग रिजर्वायर तैयार किया गया है। शेष बचे पंपिंग स्टेशन और अन्य निर्माण कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बारिश के दौरान शिप्रा नदी के पानी को संरक्षित करना और जरूरत पड़ने पर उसे नदी में छोड़ना है, ताकि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान घाटों पर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल ने बताया कि परियोजना के दो मुख्य भाग हैं। पहला, सेवरखेड़ी में शिप्रा नदी पर बैराज बनाकर बरसाती पानी को रोकना। दूसरा, उस पानी को पंपिंग के माध्यम से लगभग 5 किलोमीटर दूर सिलारखेड़ी तक पहुंचाकर बड़े रिजर्वायर में जमा करना। इस व्यवस्था के लिए चार मोटरों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 1350 किलोवाट है। मोटरें करीब 6.5 किलोमीटर की दूरी तय करके पानी को सिलारखेड़ी तक पहुंचाएंगी। सिलारखेड़ी में जमा किए गए पानी को वापस शिप्रा नदी तक पहुंचाने के लिए करीब पांच किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। खास बात यह है कि पानी को नदी तक ले जाने के लिए दोबारा पंपिंग की आवश्यकता नहीं होगी। रिजर्वायर से पानी गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के सिद्धांत पर पाइपलाइन के जरिए कुंवारिया गांव के पास शिप्रा नदी में छोड़ा जाएगा। यह स्थान किठोदा बैराज के ठीक ऊपर पड़ता है। यहां से पानी शनि मंदिर, गऊघाट होते हुए रामघाट, मंगलनाथ और सिद्धनाथ तक पहुंचेगा।

