उज्जैन में नागरिकों ने रंगोली बनाकर किया स्वागत, स्वयंसेवकों ने ली भाग
विजयादशमी के पावन अवसर पर मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का भव्य पथ संचलन शहर की 65 बस्तियों से निकला। स्वयंसेवकों ने पारंपरिक वेशभूषा में कदमताल करते हुए शहर की गलियों को अनुशासित मार्च से जीवंत कर दिया। मार्गों पर जगह-जगह पुष्प वर्षा और सुंदर रंगोली बनाकर नागरिकों ने संघ के स्वयंसेवकों का गर्मजोशी से स्वागत किया। गलियों के दोनों ओर खड़े होकर लोगों ने फूल बरसाए और सड़क के दोनों ओर खड़े होकर स्वयंसेवकों का अभिवादन किया। यह दृश्य शहर की एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक था, जहाँ समुदाय ने मिलकर इस आयोजन का समर्थन किया। बैंड की मधुर धुन और हाथों में लाठी लिए स्वयंसेवकों ने एक लयबद्धता के साथ मार्च किया, जो उनके प्रशिक्षण और समर्पण को दर्शाता था। पथ संचलन की शुरुआत से पहले, संबंधित बस्तियों में विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत, प्रेरणादायक अमृत वचन, गहन बौद्धिक सत्र और प्रार्थना सभाएं शामिल थीं। इन आयोजनों ने स्वयंसेवकों में राष्ट्र प्रेम और सेवा की भावना को और अधिक प्रबल किया। इसके पश्चात्, स्वयंसेवक अत्यंत अनुशासित तरीके से निर्धारित मार्गों से होते हुए निकले और सफलतापूर्वक पथ संचलन को पूरा कर अपनी-अपनी बस्तियों में लौट आए। यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत सुनियोजित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जिसने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की सराहना बटोरी। विजयादशमी पर शहर की विभिन्न बस्तियों से पथ संचलन निकालने की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। यह आयोजन न केवल संघ के स्वयंसेवकों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों को एक साथ लाने और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का एक मंच भी प्रदान करता है। इस वर्ष, यह परंपरा 25 अक्टूबर तक जारी रहेगी, जिसमें अलग-अलग बस्तियों में इसी तरह के आयोजन किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य स्वयंसेवकों के बीच अनुशासन, एकता और राष्ट्र सेवा की भावना को बढ़ावा देना है। प्रत्येक बस्ती में होने वाले कार्यक्रम अपने आप में अनूठे होंगे, जो स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी दर्शाएंगे। उज्जैन शहर में इस वर्ष के पथ संचलन ने एक विशेष आकर्षण जोड़ा, जहाँ नागरिकों ने सड़कों पर सुंदर रंगोली बनाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। यह पहल स्थानीय निवासियों द्वारा संघ के प्रति दिखाए गए स्नेह और सम्मान का प्रतीक थी। रंगोली केवल एक सजावट नहीं थी, बल्कि यह एकता और सद्भाव का एक मौन संदेश भी दे रही थी। स्वयंसेवकों ने भी इस प्रेमपूर्ण स्वागत का जवाब तालियों और अभिवादन से दिया। इस प्रकार के आयोजन शहर के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करते हैं और नागरिकों के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाते हैं। बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते हुए स्वयंसेवकों की टोली ने एक अनुशासित और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। यह समग्र तैयारी उनके अनुशासित मार्च का आधार बनी।

