सरकारी बीमा योजना में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस योजना के तहत 482 कथित फर्जी क्लेम के जरिए 9.60 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि बिना मरे ही लोगों को कागजों में मृत दिखाकर डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर बीमा राशि हासिल कर ली गई। सीआईडी इस मामले में केस दर्ज कर जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर बीमा दावों को मंजूरी दिलाई गई। इस तरह सरकारी योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि मृतकों के नाम पर भुगतान किया गया है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और दस्तावेजों में हेराफेरी का गंभीर मामला है। अब जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि फर्जी प्रमाणपत्र किसने जारी किए। क्लेम को किस स्तर पर मंजूरी मिली और इस पूरे मामले में कौन-कौन शामिल है, इसका भी खुलासा होना बाकी है। दोषियों की पहचान कर राशि की वसूली तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करना जरूरी है। यह घोटाला उजागर होने के बाद बीमा राशि हड़पने के इस तरीके की चर्चा हो रही है। सीआईडी की जांच में यह स्पष्ट होगा कि यह किस हद तक फैला हुआ है और इसमें कितने लोग शामिल हैं। फिलहाल, जांच जारी है और जल्द ही इस मामले की विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। इस तरह के फर्जीवाड़े से सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है। इसलिए, दोषियों को कड़ी सजा मिलना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। यह पूरा मामला 21 26 अक्टूबर को उजागर हुआ, जिससे संबंधित जांच 26 अक्टूबर तक चलने की उम्मीद है।
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बीमा योजना में 482 फर्जी क्लेम, 9.60 करोड़ का घोटाला
21 अक्टूबर 2026 को 10:46 pm बजे
