विजयदशमी पर दमोह में 51 फीट के रावण का दहन, 30 मिनट चला युद्ध
दमोह के तहसील ग्राउंड में सोमवार रात विजयदशमी का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम के दौरान भगवान राम और रावण की सेनाओं के बीच लगभग 30 मिनट तक युद्ध का मंचन किया गया। रावण दहन के बाद मैदान में उपस्थित जनसमूह ने 'जय श्रीराम' के नारे लगाए और आतिशबाजी का शानदार प्रदर्शन हुआ। इस आयोजन की शुरुआत शहर की मोरगंज गल्ला मंडी स्थित श्रीराम मंदिर से हुई, जहाँ से राम की सेना निकली। यह सेना शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए तहसील ग्राउंड तक पहुंची। तहसील ग्राउंड में एक विशेष रूप से तैयार मंच पर राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध का सजीव मंचन किया गया। इस दौरान भगवान राम द्वारा रावण के वध का हृदय विदारक दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। रावण के पुतले को आग लगाने के लिए 12 आतिशबाजी के शॉट दागे गए, लेकिन दुर्भाग्यवश, वे सीधे पुतले तक नहीं पहुंच पाए। पुतले को जलाने के प्रयास में आई प्रारंभिक असफलता के बाद, समिति के सदस्यों ने तत्परता दिखाई। उन्होंने पुतले के अत्यंत निकट जाकर विशेष आतिशबाजी चलाई। इस साहसिक प्रयास के बाद ही रावण के विशाल पुतले में आग लग सकी और वह धू-धू कर जल उठा। यह क्षण दर्शकों के लिए अत्यंत रोमांचक था। यह पूरा कार्यक्रम रात लगभग 11 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन के शुरू होने से पहले, सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बीडीएस (बम निरोधक दस्ता) की एक विशेष टीम ने मैदान का गहन निरीक्षण किया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। आयोजन से पूर्व, सागर से आई बीडीएस टीम ने तहसील ग्राउंड परिसर के चप्पे-चप्पे का बारीकी से निरीक्षण किया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण था। कार्यक्रम के दौरान, पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की जा रही थी। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए दो विशेष ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया गया। इन कैमरों की मदद से पूरे क्षेत्र पर पैनी नजर रखी गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी की संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और शांति व्यवस्था बनाए रखी जा सके। श्रीराम जी सेवा समिति के सदस्य अनुनय श्रीवास्तव ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तहसील ग्राउंड में रावण दहन का यह 46वां वर्ष था। यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है और समिति इसे हर साल धूमधाम से मनाती है। अनुनय श्रीवास्तव ने यह भी जानकारी दी कि कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए बारिश ने खलल डाला। हल्की बूंदाबांदी से माहौल थोड़ा प्रभावित हुआ, लेकिन आयोजकों के दृढ़ संकल्प के आगे प्रकृति भी हार गई। बारिश थमने के तुरंत बाद, आयोजन को निर्बाध रूप से जारी रखा गया। समिति के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर और पूरी भव्यता के साथ संपन्न हो। उनकी मेहनत रंग लाई और आयोजन सफल रहा। इस वर्ष के विजयदशमी उत्सव में बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। तहसील ग्राउंड दर्शकों से खचाखच भरा रहा, जो इस प्राचीन परंपरा के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है। राम की जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय का यह पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के सफल समापन के बाद, उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं। आतिशबाजी के रंगीन नजारों और 'जय श्रीराम' के नारों के बीच, सभी ने इस अवसर की खुशियों को साझा किया।




