40.75 इंच बारिश हुई, 44 दिन बारिश वाले रहे
सीहोर जिले में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले चार दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश ने मौसम में ठंडक घोल दी है। इस सीजन में अब तक 40.75 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि 44 दिन ऐसे रहे जब जिले में बारिश हुई। बेमौसम की मार झेल रही खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल अब पानी भरने से संकट में आ गई है। वहीं, शहर में भी जलभराव की स्थिति बन गई है। गांवों में भी रुक-रुककर फुहारें और हल्की बारिश जारी है, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। पिछले चार दिनों के दौरान सीहोर शहर और आसपास के नगरीय क्षेत्रों में दो बार अच्छी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान सड़कों पर पानी भर गया और तापमान में आई गिरावट के कारण लोगों को ठंडक का अहसास होने लगा। ग्रामीण इलाकों में भी लगातार फुहारें और हल्की बारिश का सिलसिला बना हुआ है। मौसम में बढ़ी हुई नमी के कारण बारिश के हालात बने हुए हैं। मौसम में इस अप्रत्याशित बदलाव के पीछे सक्रिय वेदर सिस्टम और चक्रवात के असर को जिम्मेदार बताया जा रहा है। हवा के रुख में बदलाव और दक्षिण-पूर्वी हवाओं के सक्रिय होने से वातावरण में नमी की मात्रा काफी बढ़ गई है। इसी नमी के कारण सीहोर सहित प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए हुए हैं और गरज-चमक के साथ बारिश होने का दौर जारी है। यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक बादलों और बारिश का असर बने रहने की संभावना है।
सीहोर में 40.75 इंच बारिश दर्ज, 44 दिन बरसने वाले, बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबीं
मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सलाह दी है कि वे अपने खेतों में कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं या उसे अच्छी तरह से ढक कर रखें। बारिश के दौरान कीटनाशक और उर्वरकों के छिड़काव से बचने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि इससे फसलों को और नुकसान हो सकता है। बारिश के कारण जहां एक ओर किसानों की चिंताएं बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर शहरों में जलभराव की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ है। लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठंडक बढ़ने से लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिले में इस सीजन में अब तक कुल 40.75 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से अधिक है। बारिश वाले दिनों की संख्या भी 44 रही है, जो सामान्य से काफी अधिक है। यह असामान्य वर्षा पैटर्न किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।

