18 घंटे का सफर तय कर 7-8 बजे पहुंचेगी भिटौली कुंड
भव्य महाकाली प्रतिमा की विसर्जन यात्रा आज रविवार, 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे प्रतिमा स्थापना स्थल से शुरू होगी। यह यात्रा करीब 18 घंटे का सफर तय करके दूसरे दिन, 26 अक्टूबर को सुबह 7-8 बजे भिटौली कुंड गौरीघाट पहुंचेगी, जहां प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। पिछले 70 वर्षों से यह प्रतिमा जबलपुर में आस्था और चमत्कार का केंद्र बनी हुई है, जो लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इस प्रतिमा के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा का ही परिणाम है कि इसकी विसर्जन यात्रा में 18 घंटे का लंबा समय लगता है। छोटी लाइन फाटक से गौरीघाट स्थित भिटौली कुंड तक के रास्ते में लगभग एक लाख लोग हर कदम पर पूजन-अर्चन करते हैं और लाखों की संख्या में नारियल भेंट करते हैं। मां के भक्तों की श्रद्धा केवल जबलपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में फैली हुई है। हर साल शिर्डी सांई सेवा संस्थान द्वारा मातारानी के लिए गुलाब की माला भेजी जाती है। इसी तरह नागपुर से भी भक्त प्रतिवर्ष मखाने की माला भेजते हैं। जयपुर और गुजरात के लोग भी विशेष रूप से यहां आकर माता को चुनरी चढ़ाते हैं और विसर्जन जुलूस में शामिल होते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आस्था का प्रतीक बन गई है। समिति के अध्यक्ष एवं आयोजक एडवोकेट अखिल राज ने बताया कि सन 1955 में इस प्रतिमा की स्थापना पहली बार की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि समिति अपने विधान के अनुसार 13 दिनों के लिए प्रतिमा की स्थापना करती है। इस दौरान भक्तगण पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ माता की पूजा-अर्चना करते हैं। विसर्जन जुलूस के दौरान जबलपुर से गौरीघाट के बीच कम से कम 1 लाख लोगों का सैलाब प्रतिमा के दर्शन और पूजन के लिए उमड़ पड़ता है। यह जनसैलाब प्रतिमा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है। श्रद्धालु न केवल दर्शन करते हैं, बल्कि जुलूस मार्ग की स्वयं सफाई और धुलाई भी करते हैं, जो उनकी भक्ति और सेवा भाव का अनूठा उदाहरण है। इस अवसर पर लाखों की संख्या में नारियल फोड़े जाते हैं, जो एक परंपरा का हिस्सा है। माता का नींबू और भभूत पाने के लिए भक्तों में होड़ लगी रहती है। पंडा द्वारा भक्तों को दिया जाने वाला नींबू विशेष रूप से चमत्कारी माना जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करता है। यह मान्यता वर्षों से चली आ रही है और भक्तों के विश्वास का आधार है। एडवोकेट अखिल राज ने बताया कि महाकाली को जबलपुर की महारानी के नाम से भी जाना जाता है। यह उपाधि उनकी महत्ता और जबलपुर के लोगों के जीवन में उनके महत्व को दर्शाती है।

