दमोह जिले के ग्राम सरखड़ी में प्रगतिशील कृषक राजकुमार सोनी ने बदलते मौसम के मिजाज को भांपते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, दमोह के तकनीकी मार्गदर्शन में लगभग 35 एकड़ क्षेत्रफल में ज्वार की उन्नत खेती की है। इस नई पहल के तहत, उन्होंने खरीफ मौसम में उगाई जाने वाली पारंपरिक उड़द और सोयाबीन की फसलों में बदलाव कर, कम पानी और कम खाद-उर्वरक के उपयोग से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उद्देश्य से ज्वार की फसल को चुना। यह कदम विशेष रूप से अलनीनो के संभावित प्रभाव और बदलती जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र, दमोह के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मनोज कुमार अहिरवार की सलाह पर राजकुमार सोनी ने यह निर्णय लिया। डॉ. अहिरवार ने किसानों को मौसम के अनुरूप नई फसलों को अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस ज्वार फसल की खेती में प्रति एकड़ लगभग छः से आठ हजार रुपये की लागत आती है, जबकि उत्पादन 15 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक प्राप्त होने की उम्मीद है। यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से एक लाभकारी विकल्प साबित हो सकता है।
कृषि में नवाचार
दमोह मंडी में ज्वार को 4000 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आसानी से बेचा जा सकता है, जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा। कृषि विज्ञान केंद्र, दमोह, इस प्रकार के नवाचारों को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राजकुमार सोनी जैसे प्रगतिशील किसानों के प्रयासों से अन्य किसानों को भी प्रेरित किया जा रहा है कि वे पारंपरिक फसलों से हटकर नई और लाभकारी फसलों की ओर बढ़ें। बदलते मौसम और अलनीनो के प्रभाव को देखते हुए, ज्वार की यह खेती एक दूरदर्शी कदम है जो भविष्य में कृषि की स्थिरता और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है। यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और किसानों के परिश्रम से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
