एसआईटी मामले की विवेचना करेगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए काम करेगी
भोपाल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की 30 सितंबर को हुई हत्या के मामले में पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। 21 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, यह टीम मामले की गहराई से जांच करेगी और आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करेगी। इस SIT में पुलिस मुख्यालय, अपराध शाखा और रातीबड़ थाने के अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। पुलिस हर सप्ताह जांच की प्रगति के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करेगी, जिससे मामले की विवेचना में तेजी आने की उम्मीद है। यह कदम तब उठाया गया है जब वारदात को 21 दिन बीत चुके हैं और मुख्य आरोपी, जो कि मृतक का केयरटेकर वरुण कुमार था, अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। 30 सितंबर की रात को रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की उनके भोपाल स्थित घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में लूटपाट की आशंका भी जताई गई थी, लेकिन मुख्य संदिग्ध के तौर पर केयरटेकर वरुण कुमार की भूमिका की गहनता से पड़ताल की जा रही है। वरुण कुमार को हत्या से कुछ ही दिन पहले राकेश अग्रवाल की देखभाल के लिए एक एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किया गया था। वह 24 घंटे के केयरटेकर-कम-नर्स के रूप में काम कर रहा था। हत्या के बाद से ही वह घर से लापता है और उसके कुछ सामान भी गायब बताए जा रहे हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद उसके भागने के रूट का पता लगाया है। घर में सीसीटीवी कैमरे न होने के कारण आसपास लगे कैमरों से मिली फुटेज जांच में काफी मददगार साबित हुई है। पुलिस के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के बाद वरुण कुमार रात के अंधेरे में ही ट्रेन पकड़कर फरार हो गया। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की दर्जनभर टीमें सक्रिय रूप से तलाश कर रही हैं। पुलिस ने आरोपी के भागने के पूरे रूट को ट्रेस कर लिया है और सभी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। इस बीच, रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले का खुलासा न होने से नाराज आईएएस एसोसिएशन के पदाधिकारी बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिले। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव और केवीएस चौधरी कोलसानी ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा और मामले की शीघ्र जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने इस घटना पर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन पुलिस आयुक्त कार्यालय से 21 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के तहत किया गया है। घर में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे, इसलिए बाहरी कैमरों पर निर्भर रहना पड़ा।
