23 अगस्त, 2008 से लागू यह कानून वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण का अधिकार दिलाता है
वरिष्ठजनों के लिए भरण-पोषण अधिनियम-2007 एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। जिस प्रकार उम्र बढ़ने पर सहारे के लिए लाठी की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार यह अधिनियम वरिष्ठजनों के लिए सहारे की लाठी साबित हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य वरिष्ठजनों और अभिभावकों को ऐसी व्यवस्था प्रदान करना है, जिससे वे एक विशेष ट्रिब्यूनल (अधिकरण) के समक्ष निर्धारित 90 दिन की समय-सीमा के अंदर भरण-पोषण के अपने अधिकार को सरलता और शीघ्रता से प्राप्त कर सकें। यह कानून वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करता है, ताकि वे अपने बुढ़ापे में भी गरिमापूर्ण जीवन जी सकें। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम-2007 प्रदेश में 23 अगस्त, 2008 से लागू है। इस अधिनियम के अंतर्गत, वे अभिभावक और वरिष्ठ नागरिक जो अपनी आय अथवा संपत्ति से होने वाली आय से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं, अपने वयस्क बच्चों अथवा अन्य संबंधियों से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं। यह प्रावधान उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो आर्थिक तंगी के कारण स्वयं का गुजारा करने में कठिनाई महसूस करते हैं। अधिनियम में भरण-पोषण के अंतर्गत समुचित भोजन, आश्रय, वस्त्र, चिकित्सा एवं मनोरंजन जैसी आवश्यक सुविधाओं को शामिल किया गया है, जो एक गरिमापूर्ण जीवन के लिए अनिवार्य हैं। यह अधिनियम वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। यदि कोई वयस्क संतान अपने माता-पिता अथवा वरिष्ठ परिजन की उपेक्षा करती है या उन्हें परित्यक्त कर देती है, तो यह एक संज्ञेय अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में, दोषी संतान को पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने या तीन महीने की कैद या दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और सम्मान करें, और उनकी उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भरण-पोषण प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। वृद्धजन या वरिष्ठ अभिभावक, जिन्हें अपने बच्चों या संबंधियों से भरण-पोषण की आवश्यकता है, वे सीधे अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया को तेज करता है और बुजुर्गों को अनावश्यक देरी या जटिलताओं से बचाता है। यह सुनिश्चित करता है कि जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को समय पर सहायता मिल सके। भरण-पोषण ट्रिब्यूनल, वरिष्ठजनों के लिए मासिक भरण-पोषण की राशि तय करते समय उनकी आवश्यकताओं और संतान की आय क्षमता का ध्यान रखता है। यह ट्रिब्यूनल अधिकतम 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक का भरण-पोषण दिला सकता है। यह राशि सुनिश्चित करती है कि वरिष्ठ नागरिकों को भोजन, वस्त्र, आवास और चिकित्सा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध हो सके। यह प्रावधान बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कानून न केवल वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है, बल्कि उनके भावनात्मक और सामाजिक कल्याण को भी सुनिश्चित करता है।
