भोपाल: 11,000 युवाओं के भविष्य पर सवाल, सरकार ने रोकी भर्ती प्रक्रिया
भोपाल (मध्य प्रदेश): में 11,000 युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27% आरक्षण देने के फैसले को पलट दिया है। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। दूसरी ओर, सरकार ने अभी तक उन 13% पदों के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है जिन्हें होल्ड पर रखा गया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सरकार को योग्यता के आधार पर अनारक्षित उम्मीदवारों से 13% पद भरने का निर्देश दिया था। न्यायालय के आदेश के ग्यारह दिन बीत जाने के बाद भी, सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने अभी तक इन 13% पदों को भरने के संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं। सरकार इस दुविधा में है कि क्या उसे उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार होल्ड पर रखे गए 13% पदों को अनारक्षित श्रेणी के युवाओं की भर्ती करके भरना चाहिए, या यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए। सरकार ने विभिन्न विभागों द्वारा जारी की गई भर्तियों के विज्ञापनों को भी रोक दिया है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, सरकार को 14% ओबीसी आरक्षण के अनुसार भर्ती करनी चाहिए। फिर भी, राज्य को डर है कि यदि वह 14% ओबीसी कोटे का उल्लेख करते हुए भर्तियों के लिए जारी करती है, तो इस श्रेणी के लोग उसके खिलाफ हो सकते हैं। 14% कोटे वाले सर्वोच्च न्यायालय में दायर एसएलपी पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसी स्थिति में, सरकार नई भर्तियों के लिए जारी करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई का इंतजार कर रही है। राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर की हो सकती है, लेकिन उसने अभी तक शीर्ष अदालत से उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध नहीं किया है। राज्य इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई का इंतजार कर रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक नहीं लगाता, तब तक वह आदेश प्रभावी रहेगा।

