जबलपुर और डिंडोरी के 100 जनप्रतिनिधि पहुंचे पड़रिया थोबन, सराहा विकास
महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, अधारताल जबलपुर और जिला पंचायत दमोह के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) की वार्षिक कार्ययोजना 2026-27 के तहत 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक पर्यटन ग्राम पड़रिया थोबन में एक महत्वपूर्ण अध्ययन भ्रमण (एक्सपोजर विजिट) का आयोजन किया गया। इस बहुप्रतीक्षित दौरे में जबलपुर और डिंडोरी जिलों की विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए 100 जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के एक समूह ने गांव का दौरा किया। उन्होंने वहां चल रही विकास गतिविधियों, अनूठे ग्रामीण पर्यटन मॉडल और स्थानीय स्तर पर रोजगार के सृजन के लिए अपनाए जा रहे अभिनव तरीकों का गहन अवलोकन किया। यह भ्रमण दो चरणों में संपन्न हुआ, जिसमें पहले चरण के तहत 22 अक्टूबर को जनपद पंचायत जबलपुर की ग्राम पंचायतों से 50 जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का दल पड़रिया थोबन पहुंचा। दूसरे चरण में, 23 अक्टूबर को डिंडोरी जिले की जनपद पंचायत समनापुर से आए 50 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने गांव की समग्र विकास गतिविधियों का अध्ययन किया। दोनों ही दलों को गांव में अपनाए गए विकास के नवाचारों और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। अध्ययन दल के सदस्य पड़रिया थोबन की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति, प्रभावी स्वच्छता व्यवस्था और ग्राम विकास के क्षेत्र में किए गए विभिन्न नवाचारों से विशेष रूप से प्रभावित हुए। उन्होंने गांव में संचालित प्रमुख होमस्टे इकाइयों, जिनमें 'राधारानी', 'रामकुटी' और 'पंचवटी' शामिल हैं, का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रतिनिधियों ने इन होमस्टे के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यवस्थाओं को समझा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित करने और गांव की अनूठी विशेषताओं को पर्यटन से जोड़ने के प्रयासों की पुरजोर सराहना की। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और सतत विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस एक्सपोजर विजिट के दौरान, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एनआईआरडी) के स्टेट कंसल्टेंट जयप्रकाश सूर्यवंशी और नवीन शिवा ने प्रतिनिधिमंडलों को गांव की अब तक की उपलब्धियों और इसके सफल विकास मॉडल से अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक भागीदारी से ग्राम विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वय में जनपद पंचायत जबेरा के विकासखंड समन्वयक अंकित दुबे और उपयंत्री सुरेश प्रजापति का योगदान भी सराहनीय रहा। उन्होंने सुनिश्चित किया कि सभी प्रतिभागियों को पर्याप्त जानकारी मिले और वे अपने अनुभव साझा कर सकें। गांव के युवा विनोद बाजपेयी ने दोनों जिलों से आए जनप्रतिनिधियों को ग्राम भ्रमण कराया और विभिन्न विकास कार्यों की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने स्थानीय लोगों के प्रयासों और उनकी भागीदारी पर प्रकाश डाला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ग्राम विकास केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से ही स्थायी परिवर्तन संभव है। बाजपेयी ने बताया कि कैसे युवाओं ने आगे बढ़कर पर्यटन को बढ़ावा देने और गांव की संस्कृति को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
